
हरिद्वार। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े द्वारा उत्तराखंड के चार धामों सहित समस्त पौराणिक और गुमनाम तीर्थों के दर्शन व पूजन के लिए निकाली जाने वाली पावन पवित्र छड़ी यात्रा इस वर्ष 07 अक्टूबर 2026 से प्रारंभ होगी। यह दिव्य यात्रा 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में संतों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके देहरादून स्थित आवासीय कार्यालय में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा), हिमालय पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर वीरेंद्रानंद गिरि महाराज, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, श्रीमहंत नीलकंठ गिरि महाराज तथा जूना अखाड़े के मीडिया प्रभारी गोपाल सिंह रावत शामिल रहे।
संतों ने मुख्यमंत्री से पवित्र छड़ी यात्रा को निर्धारित शुभ मुहूर्त में हरिद्वार के अधिष्ठात्री देवी माया देवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सहर्ष सहमति प्रदान करते हुए यात्रा की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि इस पवित्र छड़ी यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल प्रसिद्ध चार धामों तक सीमित नहीं रहेगी। यात्रा उत्तराखंड के उन सैकड़ों गुमनाम, उपेक्षित पौराणिक तीर्थ स्थलों तक भी पहुंचेगी, जिनके बारे में आम श्रद्धालु और तीर्थ यात्री आज तक अनजान हैं।
उन्होंने बताया कि छड़ी यात्रा के माध्यम से हम उन तीर्थों के पौराणिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से जन-जन को परिचित कराएंगे। जब इन तीर्थों का विकास होगा तो न केवल तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने जानकारी दी कि यह यात्रा दो खंडों में विभाजित रहेगी – केदारखंड यानी गढ़वाल मंडल और मानसखंड यानी कुमाऊं मंडल के समस्त तीर्थों का भ्रमण करते हुए यात्रा पवित्र ओम पर्वत और आदि कैलाश के दर्शनों तक जाएगी।
इस अवसर पर श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने टनकपुर से बागेश्वर होते हुए कर्णप्रयाग तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का नामकरण ‘माँ नंदा देवी राजमार्ग’ करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध माँ नंदा देवी राजजात यात्रा, जो प्रत्येक 12 वर्ष में आयोजित होती है, का मुख्य पड़ाव और मार्ग यही है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की प्रतीक माँ नंदा के नाम पर इस राजमार्ग का नाम होना सनातन परंपरा का सम्मान होगा। मुख्यमंत्री धामी ने संत प्रतिनिधिमंडल को इस विषय पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
