
उत्तराखण्ड / रानीखेत। तहसील के सुदूरवर्ती वलना गांव में जंगलों की आग अब आबादी क्षेत्र तक पहुंच गई है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और भारी आक्रोश व्याप्त है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि गांव के लोग अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए खुद ही आग बुझाने में जुटे हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के बावजूद ग्राम प्रधान प्रीति पंत ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि कई बार फोन करने के बावजूद ग्राम प्रधान ने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले कई दिनों से पूरा गांव आग की चपेट में है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही।
ग्रामीण ख़याली दत्त पंत के परिवार की महिलाएं भी आग बुझाने में जुटी दिखाई दीं। इस दौरान नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (एनयूजे) के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की बदहवास स्थिति देख मामले का संज्ञान लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने ग्राम प्रधान से वन विभाग को सूचना देने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद एनयूजे जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा से फोन पर संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने तत्काल दमकल टीम भेजने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने कुछ राहत महसूस की।
गांव में लगातार फैल रही आग से लोग भयभीत हैं और प्रशासन से जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
