हरिद्वार। मंगलवार को सत्यम पाठशाला के बच्चों ने जनपद मुख्यालय का भ्रमण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर प्रशानिक कार्यों की जानकारी ली।
डीएम मयूर दीक्षित, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह तथा एसपी क्राइम एवं यातायात निशा यादव ने बच्चों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुशासन, यातायात नियमों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी।
इस अवसर पर डीएम मयूर दीक्षित ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है तथा कड़ी मेहनत एवं लगन से ही लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि वह कड़ी मेहनत एवं लगन के साथ पढ़ाई करें ताकि लक्ष्य को हासिल किया जा सके। उन्होंने बच्चों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
डीएम ने कहा कि वर्तमान समय में कई बच्चे मोबाइल के अधिक इस्तेमाल के कारण अपना महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में बच्चों को अपने समय का सदुपयोग पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में करना चाहिए।
एसपी क्राइम एवं यातायात निशा यादव ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि हर बच्चा आईपीएस या आईएएस बन सकता है इसके लिए पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। यदि लक्ष्य निर्धारित है और उसके लिए निरंतर मेहनत की जाए तो बच्चे अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने बच्चों को अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सीएमओ डॉ. आर.के. सिंह ने बच्चों को शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित रूप से समाचार पढ़ना चाहिए और अपने आसपास की गतिविधियों की जानकारी रखनी चाहिए। परीक्षा के दौरान पूरी तैयारी के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत आदतें व्यक्ति को कमजोर करती हैं, इसलिए सही और गलत की पहचान करना जरूरी है।
सत्यम पाठशाला के संचालक अरुण कश्यप ने बताया कि बच्चों को शिक्षा के साथ समाज की मुख्यधारा से जोड़ना पाठशाला का प्रमुख उद्देश्य है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर बच्चों को प्रशासनिक अधिकारियों से मिलवाया जाता है, ताकि उन्हें मार्गदर्शन मिलने के साथ भविष्य में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिल सके।
भ्रमण के दौरान शिक्षिका रेणु देवी सहित आशा, वैष्णवी, शिवम, अश्विन, शालू, आयुष, हंसिका, तेजस, शौर्य, प्राणिका, प्रणव, मीरा, पायल, कृष्णा, श्रेष्ठ, देवांशु, शिवानी, दिव्यांका, मानवी, अनु और वांशिका आदि बच्चे मौजूद रहे।

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