
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में डाम कोठी के निकट स्थित आद्य जगतगुरु शंकराचार्य चौक को हटाए जाने से अखाड़ों तथा संत समाज में रोष व्याप्त है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा शंकराचार्य चौक का सौंदर्यकरण किया जा रहा है जिसके चलते इस चौक को इस स्थान से हटाकर सड़क के किनारे स्थापित कर मूर्ति लगाए जाने की योजना है। लेकिन जिस स्थान का चयन किया गया है वहां पर पहले से ही सुलभ शौचालय बना हुआ है और प्राधिकरण शौचालय को तोड़कर यहां मूर्ति लगाने जा रहा है। चौक हटाने का तर्क यह दिया जा रहा है कि वर्तमान में जहां शंकराचार्य चौक स्थापित है उससे यातायात में बाधा पहुंचती है तथा दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। जिसके चलते इस चौक को स्थानांतरित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण ने संतों की एक समिति से विचार विमर्श कर उनकी सहमति से इसे हटाए जाने का निर्णय लिया है। लेकिन इसके लिए अन्य अखाड़ों, धर्माचार्य तथा साधु-संतों से कोई वार्ता नहीं की गई। जूना अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्री महंत महेश पुरी ने मूर्ति हटाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि आदि जगदगुरु शंकराचार्य दश नाम सन्यास परंपरा के आदि गुरु हैं तथा सभी के पूज्य हैं। इस चौक पर उनकी प्रतिमा को विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर विराजमान किया गया था जिसमें सभी अखाड़े तथा संत समाज शामिल थे और सभी ने इसके निर्माण में भी सहयोग प्रदान किया था। ऐसी स्थिति में अखाड़ों, धर्माचार्य व अन्य संतों के संगठन से बिना वार्ता किया मूर्ति हटाया जाना आपत्तिजनक है। श्री महंत महेश पुरी ने इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया कि जिस स्थान पर मूर्ति स्थापित किए जाने की योजना बनाई जा रही है वहां पहले से ही शौचालय बना हुआ है। उसे हटाकर शंकराचार्य जी की मूर्ति स्थापित किए जाने की बात की जा रही है जो की घोर आपत्तिजनक तथा शंकराचार्य भगवान का अपमान है ।
उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है की मूर्ति को मूल स्थान पर ही रहने दिया जाए यदि आवश्यकता हो तो चौक को व्यवस्थित करने के लिए अन्य विकल्प ढूंढे जाए उन्होंने कहा कि चौक की परिधि कम की जा सकती है या कोई अन्य मार्ग बनाया जा सकता है।
