हरिद्वार। नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स की और से ज्वेलर्स एसोसिएशन हरिद्वार के सहयोग से स्वास्थ्य पर चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस दौरान ज्वेलर्स एसोसिएशन हरिद्वार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और चिकित्सकों से बातचीत की।
सीनियर कंसल्टैंट कार्डियोलॉजी डॉ.राजीव राजपूत ने बताया कि हृदय रोग चुपचाप बढ़ते हैं। इसका पता तब तक नहीं चलता जब तक हार्ट संबंधी की कोई बड़ी परेशानी सामने ना आए। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान से खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित तौर से हैल्थ स्क्रीनिंग करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट और तम्बाकू सेवन से परहेज हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। सीनियर कंसल्टैंट जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ.निखिल अग्रवाल ने कहा बताया कि लिवर, पैन्क्रियाज, गॉल ब्लैडर और डाइजेस्टिव ट्रैक्ट के कैंसर बढ़ते जा रहे हैं। जब तक मरीज डाक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। एसिडिटी बने रहने, निगलने में कठिनाई होने, बिना वजह वजन के घटने और पेट में बेचैनी होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। रोग की समय पर पहचान होने पर उचित इलाज से समस्या को दूर किया जा सकता है। सीनियर कंसल्टैंट गायने ऑन्कोलॉजी डॉ.पाखी अग्रवाल ने कहा कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर सबसे कम ध्यान देती हैं। प्रिवेंटिव हैल्थकेयर द्वारा महिलाएं लंबे समय तक खुद को स्वस्थ रख सकती हैं। सीनियर कंसल्टैंट न्यूरोसर्जरी डॉ.गौरव त्यागी ने कहा सिर और पीठ में होने वाला दर्द हमेशा मामूली हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कमजोरी, सुन्नपन, दौरा या दृष्टि और संतुलन में गड़बड़ी महसूस हो तो फौरन अपने चिकित्सक से संपर्क करें। इलाज में देर से बड़ा नुकसान हो सकता है। डॉ.अंशुल वर्मा, कंसल्टैंट, जीआई एवं एचपीबी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली ने कहा, पिछले दशक में कैंसर केयर में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है। बेहतर डायग्नोस्टिक्स, प्रेसिजन सर्जरी और मल्टीडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण की मदद से कई तरह के गैस्ट्रोइंटेस्टाईनल कैंसर के इलाज में सफलता की दर बढ़ी है। लेकिन मरीजों को बेहतर नतीजे तभी मिलते हैं, जब बीमारी का निदान जल्दी होता है। अगर परिवार में कैंसर, क्रोनिक लिवर डिजीज या लंबे समय तक डाईजेस्टिव गड़बड़ी का इतिहास रहा हो, तो लक्षणों के बढ़ने का इंतजार करने की बजाय नियमित तौर से जाँच कराते रहना चाहिए। जागरुकता और समय पर कार्रवाई नतीजों को बेहतर बनाने के लिए सबसे प्रभावशाली उपाय हैं। सीनियर कंसल्टैंट यूरो ऑन्कोलॉजी डा.हर्षित गर्ग ने कहा कि लोग झिझक के कारण यूरिनरी समस्याओं के बारे में बात नहीं कर पाते हैं, जिससे गंभीर लक्षण भी छिपे रह जाते हैं। मूत्र में खून आना, बार-बार मूत्र लगना, मूत्र करने में दिक्कत या कमर के एक तरफ लगातार दर्द महसूस होना जैसे लक्षण महसूस होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। इस अवसर पर ज्वैर्ल्स एसोसिएशन उत्तराखंड के स्टेट प्रसिडेंट नीरज गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी गौरव मासून, कोषाध्यक्ष अश्वनी गोयल, सेक्रेटरी हरविंदर सिंह, वाइस प्रेसिडेंट रवि वर्मा, विवेक अग्रवाल, निपुन मित्तल, मनोज मित्तल और श्रीराम वर्मा आदि मौजूद रहे।

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