
हरिद्वार / बहादुरपुर जट। ग्राम बहादुरपुर जट में चल रही ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार रात सीता हरण और राम-सुग्रीव मित्रता के दृश्य का स्थानीय कलाकारों ने बहुत ही मार्मिक और सुंदर मंचन किया। दृश्य को देखकर पंडाल में बैठे सैकड़ों दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
रामलीला निर्देशक धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि कथा में खर-दूषण और त्रिसरा वध के बाद सूर्पनखा लंका जाकर रावण को अपनी व्यथा सुनाती है। यह सुनकर क्रोधित रावण मारीच के साथ मिलकर सीता हरण की योजना बनाता है। मारीच सोने के हिरण का रूप धारण कर पंचवटी में सीता के सामने आता है। सीता के आग्रह पर राम हिरण को पकड़ने जाते हैं। इसी दौरान मारीच राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। सीता के कहने पर लक्ष्मण भी राम की सहायता के लिए चले जाते हैं। मौका पाकर रावण साधु वेश में भिक्षा मांगने आता है। लक्ष्मण रेखा के कारण वह कुटिया में प्रवेश नहीं कर पाता और छल से सीता को बाहर बुलाकर उनका हरण कर पुष्पक विमान से लंका की ओर ले जाता है। सीता की रक्षा के लिए आए जटायु को रावण घायल कर देता है। पंचवटी लौटने पर सीता को न पाकर राम विलाप करते हैं। बाद में शबरी की कुटिया और ऋष्यमूक पर्वत पर राम और सुग्रीव की मित्रता का दृश्य दिखाया गया।
मंचन में राम की भूमिका चौधरी कृष्ण पाल, लक्ष्मण की भूमिका पुष्पेन्द्र उर्फ काला, हनुमान की भूमिका पाल्ला प्रजापति, रावण की भूमिका श्याम सिंह चौधरी, सीता की भूमिका राहुल सिसोदिया और मारीच की भूमिका ललित चौधरी ने निभाई। सभी कलाकारों के अभिनय की ग्रामीणों ने खूब सराहना की।
