
हरिद्वार। हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में विराजमान प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में चतुग्र्रही योग के पावन अवसर पर ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ की प्रार्थना के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गयी। इस अवसर पर लाखों गायत्री परिवार के प्रतिनिधि रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या एवं महिला मंडल प्रमुख शैफाली पंड्या ने देवाधिदेव महादेव का पूजन किया। वहीं जाने माने पाश्र्व गायक हिमेश रेशमिया ने भी सपरिवार पूजन में भाग लिया। उन्होंने भी पूर्ण वैदिक विधि-विधान और पवित्र मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का अभिषेक कर समस्त विश्व के आरोग्य और कल्याण की प्रार्थना की। शांतिकुंज व विश्वविद्यालय परिवार, साधकगण एवं श्रद्धालुओं ने विश्वशांति, लोकमंगल और मानव कल्याण की भावना से सामूहिक प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का एक साथ स्थित होना चतुग्र्रही योग का निर्माण कर रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे एक विशेष और प्रभावशाली संयोग माना जाता है। साथ ही सूर्य और शुक्र की युति से शुक्रादित्य योग का भी निर्माण हो रहा है, जो आध्यात्मिक साधना, सकारात्मक संकल्प और सृजनात्मक ऊर्जा के लिए शुभ माना जाता है। ऐसे दुर्लभ संयोग कम ही बनते हैं। पूजन क्रम में पुरुष सुक्त के साथ रुद्राभिषेक, महाकालाष्टक पाठ आदि किया गया। शांतिकुंज के आचार्यों ने कहा कि ग्रहों के विशेष योग मानव जीवन में मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव उत्पन्न करते हैं। अत: ऐसे समय में सकारात्मक चिंतन, जप-तप और प्रार्थना से वातावरण में सद्भाव एवं संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
वहीं अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं शैलदीदी ने भी विशेष रुद्राभिषेक किया और ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:’ की भावना के साथ विश्व कल्याण की कामना की। प्रमुखद्वय ने इसे आध्यात्मिक जागरण और वैश्विक शांति के लिए एक प्रेरक अवसर बताया।
शांतिकुंज, देवसंस्कृति विवि के सैकड़ों कार्यकत्र्ताओं ने वाहन रैली निकाली। रैली को देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हरिद्वार को नशा मुक्त एवं स्वच्छ बनाये रखने के उद्घोष करते हुए यह रैली भोपतवाला, पावनधाम, रानीपुर, हरिद्वार से वापस लौटकर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा की पावन समाधि स्थल पहुंची। जहाँ 108 पीतवस्त्रधारी बहिनों ने आरती कर स्वागत किया एवं महादेव की विशेष अभ्यर्थना की।
