
हरिद्वार। अखिल भारतीय ओबीसी वर्ग संयुक्त मंच के संयोजक विजयपाल सिंह ने यूजीसी कानून को समाज के सभी वर्गों के हित में बताया है। प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान विजयपाल सिंह ने कहा कि विश्व विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रा का उत्पीड़न रोकने के लिए 1956 में पहली बार यूजीसी कानून लागू किया गया था। लेकिन तब इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। 2012 में उत्पीड़न के चलते रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थाओं में उत्पीड़न की घटनाओं की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया और सिफारिशें लागू की गयी। लेकिन किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गयी। जिससे उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आती रही। जिनकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने जांच और कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए यूजीसी कानून बनाया और 13 जनवरी 2026 को इसे लागू किया गया। विजयपाल सिंह ने कहा कि कुछ लोग कानून का अध्ययन किए बिना ही इसका विरोध कर रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार ने समाज के सभी वर्गो का ध्यान रखते हुए सामाजिक न्याय की अवधारणा पर समावेशी कानून लागू किया है। कानून में रंग, भाषा, क्षेत्रीयता के आधार पर भेदभाव करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया। महिलाओं, दिव्यांगों, इडब्लयूएस को भी कानून का लाभ मिलेगा। विवि और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के उत्पीड़न पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि कानून के समर्थन में राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भी भेजा गया है। इस दौरान धर्मपाल ठेकेदार, सुनील प्रजापति ने भी विचार रखे।
